Thursday, August 13, 2009

इमां और मुहब्बत

उसे मुहब्बत में बेईमानी का हुनर अत था
मेरी बेईमानी का भी एक इमां था
उसने इश्क किया, धोका दिया
मैंने बस वफ़ा की, जितनी हो सकी
जान देना ही इश्क नही होता है
इमां से इश्क करना इश्क होता है
ऐसा मानना था मेरा
पर सब कुछ ग़लत था
आज कल लोग, बेईमानी पसंद करते हैं
इश्क में गद्दारी पसंद करते हैं
मैं ये सोचता हूँ हर एक लम्हा
ये दुनिया मेरे लायक नही
खुश ठाट मै, जब मै था तनहा.

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