Saturday, August 15, 2009

तादात

बड़ों को प्रणाम और छोटों को प्यार, बचे बराबर वालों को नमस्कार...

अनगिनत हमलों के बावजूत भी जस्बा कम नही हुआ

हम अकेले नही खड़े थे कल की शाम, किले के बहार

इर्द गिर्द देखा तो एक तादाद सी दिखी

एक बेहद बेखौफ सी तादात...

ना जाने आकबरों में क्या क्या लिखा था

ना जाने समाचारों में क्या क्या दिखा था

कई धर्मों राज्यों के लोग थे वहां

कई धर्मों का समूह था वहां

एक साथ...हाँ एक साथ ।









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