अनगिनत हमलों के बावजूत भी जस्बा कम नही हुआ
हम अकेले नही खड़े थे कल की शाम, किले के बहार
इर्द गिर्द देखा तो एक तादाद सी दिखी
एक बेहद बेखौफ सी तादात...
ना जाने आकबरों में क्या क्या लिखा था
ना जाने समाचारों में क्या क्या दिखा था
कई धर्मों राज्यों के लोग थे वहां
कई धर्मों का समूह था वहां
एक साथ...हाँ एक साथ ।
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